राष्ट्रीय पर्वों तथा महत्वपूर्ण अवसरों पर पूरी गरिमा और सम्मानपूर्वक राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा भारतीय झंडा संहिता 2002 बनाया गया है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमा, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर आम जनता द्वारा कागज के बने झंडों को हाथ में लेकर लहराया जा सकता है, लेकिन समारोह के पश्चात इन झंडों को विकृत अथवा जमीन पर फेंका नही जाना चाहिए। जहां तक संभव हो ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप एकांत में किया जाए। इन अवसरों पर प्लास्टिक के बने झंडों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
झंडा फहराने का सही तरीका भारतीय झंडा संहिता की धारा तीन में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का सही तरीका बताया गया है। इसके अनुसार जब भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज ऐसी जगह पर फहराया जाए, जहां से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे। यदि किसी सरकारी भवन पर झंडा फहराने का प्रचलन है, तो उस भवन पर रविवार और अन्य अवकाश दिवसों में भी सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ध्वज फहराया जाए, चाहे मौसम कैसा भी क्यों ना हो। झंडे को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे एवं आदर के साथ उतारा जाए। झंडे को फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है, तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए। read more »
- राम तिवारी
रक्षा विशेषज्ञ एवं प्रवक्ता
रक्षा एवं स्त्रातेजिक अध्ययन विभाग,
कानपुर
आज भारत आतंकवाद की समस्या से वृहत स्तर पर ग्रसित है। पूर्वोत्तर में उग्रवादी हिंसा के साथ जेहादी संगठनों के विस्तार से स्थिति भयवह होती जा रही है। म्यांमार और बांग्लादेश से लगी खुली सीमा और घुसपैठियों के बीच जेहादी तत्वों को मिलने वाली शरण ने परिस्थिति को बेकाबू होने की स्थिति में ला दिया है। सेना की तैनाती के इतने वर्षों के बाद भी हालात में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आ पाया है। एक इलाका शांत होता है तो दूसरे इलाके में हिंसा भड़क जाती है। लम्बे समय से सेना की उपस्थिति और विभिन्न आदिवासी समूहों के टकराव से पैदा होने वाले नये-नये उग्रवादी संगठन नीतियों का कोई नया खाका तैयार होने से पहले उसे बेमानी बना दे रहे है।
असम में उग्रवादी संगठन ‘उल्फा‘ की आतंकी शैली में आए बदलाव ने नये प्रकार की हिंसा को जन्म दिया है तो पहाड़ी जिलों में के. एन. एल. एफ. और ब्लैक विंडों उग्रवादी संगठनों के साथ उल्फा के सम्बन्धों ने राज्य के पहाड़ी जिलांे में हिंसा की एक नयी शुरूआत कर दी है। मणिपुर में उग्रवादी हिंसा के बीच मैतेई और नागाओं तथा मैतेई और कूकी के बीच संघर्ष ने जातीय हिंसा के नये आयाम की शुरूआत कर दी है। ‘नगा‘ बागी संगठन एन.एस.सी.एन. के दोनों गुटो के साथ भारत सरकार का युद्ध विराम समझौता होने से सुरक्षाबल और बागियो के बीच टकराव बंद हो गया है लेकिन एन.एस.सी.एन. के दोनों गुटो (खापलांग बनाम इसाक- मुइवा) के बीच जारी गुटीय हिंसा में बहुत से निर्दोष लोग मारे जा रहे है। read more »

आज भारत देश आजाद हुऐ 62 वर्ष हो गये हैं, और हम लोगों ने जो आजादी पायी है.......
Arvind Ojha Independence Day 2009 Watch Video of Swatantrata Divas 2009 Discussion read more »

मैं हर्षद राय जयंती लाल ओझा श्री अखिल भारत गुजराती ब्रह्म समाज उप-विभाग अध्यक्ष.........
Harshad Rai Jayantilal Ojha Independence Day 2009 Watch Video of Swatantrata Divas 2009 Discussion read more »

मैं महेन्द्र छाबड़ा रायपुर शहर का निवासी, 62 वर्ष पूर्व भारत आजाद हुआ हम उस आजादी ........
Mahendra Chabada Independence Day 2009 Watch Video of Swatantrata Divas 2009 Discussion read more »

मैं राजेन्द्र निगम सचिव छत्तीसगढ़ बाल कल्याण परिषद से, आजादी की जितनी भी कहानियां हम लोगों ने........
Rajendra Nigam Independence Day 2009 Watch Video of Swatantrata Divas 2009 Discussion read more »

स्वतंत्रता आंदोलन का विशेष उपहार महात्मा गांधी के......
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जो गुलामी रही है जो दो हजार वर्षों की गुलामी रही है। भारत में अक्रमणकारी आए......
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Yuva Sandesh Comments
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