प्रस्तावना - हमारा भारतीय समाज जो एकता व पारिवारिक संस्कृति में विश्वास करता है, सदा से बुजुर्गों को सम्मान व आदर देता आया है । हमारे बुजुर्ग जो दुनिया के अच्छे व बुरे अनुभवों के आधार पर समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं, वास्तव में इस आदर के हकदार होते हैं।
परिवार में बुजुर्गों की भूमिका - संयुक्त परिवार की कल्पना यदि एक वृक्ष के आधार पर की जाए तो हमारे बुजुर्गपन उस मजबूत साख की तरह होते हैं, जिस पर पूरा वृक्ष टिका हुआ होता है । परिवार में यदि दादा-दादी, नाना-नानी ना हो तो परिवार अधूरा सा लगता है । जीवन में कई बार हम उलझन व परेशानी में घिर जाते हैं तो हमारे परिवार के बुजुर्ग ही समस्याओं की धूप में अपने अनुभवी हाथों की छाया हमें देते हैं । वे हमें जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना करने की सीख व हौसला देते हैं । read more »
भारतीय संस्कृति और त्योंहारों का एक अटूट रिश्ता है हर मौके पर, हर संबंधों पर, हर मौसम में उसके अनुरूप त्योहार हमारी पहचान है।
राखी ऐसे त्योहार का नाम है जो भारत के संस्कारों की अपनी पहचान तो स्थापित करता है जहां भाई-बहन के रिश्तों की एक अटूट विश्वास एवं प्यार मिलता है भगवान शिव के श्रावण मास के अंतिम दिन पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है इसका स्वरूप समय के अनुसार बदलता जा रहा है लेकिन मानते वहीं है। read more »
Yuva Sandesh Comments
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