हरिद्वार के जगद्गुरु आश्रम के स्वामी श्री राजराजेश्वराश्रमने की पहल पर विदेशों में भी वेद व पुराण का महात्म्यप्रचारित किया जाएगा। यह उस देश की भाषा में ही वेद व पुराण की महत्ता बताई जाएगी। इस कार्य के लिए वेदपाठियों को तैयार किया जा रहा है। भारतीय जीवन दर्शन के प्राण वेद व पुराण में समाहित हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजनों की परिपाटी भी वेद व पुराणों पर ही चलती आ रही है।इस कार्य के लिए आश्रम में दस से बीस वर्ष तक के कुल 25वेदपाठियोंको वेद व पुराणों की शिक्षा देनी शुरू की गई है । यह शिक्षा पूरी तरह हाइटेकपद्धति से दी जा रही है। कहने का मतलब है कि कंप्यूटर के जरिये वेदपाठियोंको वेद व पुराणों में दक्ष किया जा रहा है। एक वर्ष की अवधि में ही अध्ययनरत वेदपाठियों को दक्ष पाय गया है। वेद, पुराणों में निपुणता हासिल करने के बाद वेदपाठियोंको किसी एक देश विशेष की भाषा का भी ज्ञान कराया जाएगा। जब वे विदेशी भाषा में पारंगत हो जाएंगे, तो उन्हें संबंधित देश में भेजा जाएगा। वहां वे वेद, पुराणों का प्रचार-प्रसार करेंगे।
स्वामी श्री राजराजेश्वराश्रमने बताया कि इन वेदपाठियोंको धर्म प्रचार के लिए तैयार किया जा रहा है। वे भारतीय जीवन दर्शन के प्राण तत्व वेद, पुराणों के आध्यात्मिक महात्म्यको विदेशों में भी प्रचारित करेंगे उन्होंने बताया कि वर्तमान में वेद, पुराणों के प्रति विदेशों में भी खासा उत्साह बढने लगा है, इस कारन महाकुंभमें इस बार विदेशियों की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा की भारत का दर्शन विदेशी आत्मसात कर रहे है और भारतीय युवा विदेशी संकृति के दीवाने हो रहे है हमे उन्हें धर्म जे जोड़ना होगा तभी देश की प्रगति और भारत विश्व गुरु बनेगा पालको को चाहिए की वो बच्चो में बचपन से बल्कि अभिमयु की बहती गर्भ से ही इन सिक्चा को आत्मसात करे यह कार्य माता को करने चाहिए
भारत में भगवान राम के बिना प्रत्येक चर्चा अधूरी मानी जाती है । रामचन्द्र जी के संपूर्ण प्रसंगों में भारत का उल्लेख हर जगह मिलता है । भरतवंश और भारत एक दूसरे के पूरक कहे जा सकते हैं । रामायण काल के अवशेष आज भी पूरे भारतवर्ष में विराजमान है । इससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है । जहां देश में उ.प्र. और मध्यप्रदेश में चित्रकूट विराजमान है तो छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी चित्रकूट का जल प्रपात उसी कहानी को कहता है । ऐसे ही अध्ययन को एक मुकाम तक पहुंचाते हुए पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के इतिहास वेत्ताओं ने रामचन्द्र जी के वन गमन मार्ग में छत्तीसगढ़ का उल्लेख उनके वर्तमान में पाये जाने वाले शिलालेखों को लेकर एक नवीन वन गमन मार्ग की रचना की है । जिससे आने वाला समय छत्तीसगढ़ को भगवान रामचन्द्रजी से और निकट से जोड़ेगा ।
इसी प्रकार भगवान रामचन्द्र जी के वनवास के दौरान सीता माता की अपहरण से जुड़ी घटना भी एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है । इस घटना पर समाज के वर्तमान परिस्थितियों में उल्लेख करते हुए विभिन्न अवसरों पर इसे उध्दृत कर निर्णय लिये जाते हैं । माता सीता की खोज में भगवान हनुमान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है ।
भगवान रामचन्द्र जी की मुंदरी (अंगूठी) को लेकर वे जिन स्थानों पर गये उनमें आवर्तन (ब्रिटेन), अश्वक्रांत (यूरोप), रूम पट्च्चर इटाली (रोम), इंद्रुद्वीप व इंद्रद्वीप (इंग्लैण्ड), पशुशील (पुर्तगाल), क्रोंच कमथकामल (जर्मनी), सैनिक कुक्कुट हालैंड (बैल्जियम), अश्वक व आश्वीय (आस्ट्रिया ), प्रलिया कुहक (फ्रांस), तामस (स्पेन), मारक व माठक (डेनमार्क, स्वीडन), तुरष्क (स्कैंडेनेविया), आरण्यक (यूरोपियन हरकी), कानिवाल (केनिवल), बर्बर (बारबेरी), रथक्रांत सूर्यारिका (अफ्रीका), उपद्वीप, वरूण, राक्षसावास, वारिधाम (अफ्रीका के उपद्वीप), विष्णुक्रांत व असेचेनक (एशिया), हैख (साइबेरिया), रूस, शक तुरूष्ट (एशियार्टिक टरकी), महाचीन (चीन), तालतोषक (तिब्बत), पार्वत (टार्टरी), आर्वन (अरब), पारस्य (ईरान), तुखारा (बुखारा), शुद्र पवन व महका (मक्का), पहनव (काबूल), नार्दिनाश कारस्कर (मदीना), गांधार (कंधार), ब्रह्मदेश व ब्र्हमा (बर्मा), अपवाह व अपक्रांत (मस्तक), उपमल्लव (मलेका), सिघलद्वीप , सीलोन (श्रीलंका), स्वर्णभूमि व कुमारद्वीप (अमेरिका), उत्तरकुमार (उत्तरी अमेरिका), दक्षिण कुमार (दक्षिण अमेरिका), रमणक (आस्ट्रेलिया), तूलह (ब्राजील), हिरयपुर (पेरू), दरद (भूटान) प्रमुख रूप से शामिल है ।
पवन सुत हनुमान को स्वामी भक्त के रूप में देखा जाता है और वही वनगमन का मार्ग छत्तीसगढ़ और भारत में भी विभिन्न इतिहास वेत्ताओं के द्वारा ऐतिहासिक शिलालेखों में दर्ज इतिहास को पढ़कर यह प्रमाणित किया जा रहा है कि सीता माता और भगवान राम का वन गमन क्षेत्र कितना विस्तृत और विशाल रहा होगा । इसे उस काल की वैज्ञानिक उपलब्धि का सहज पैमाना बनाया जा सकता है ।
लोके कुंभइति ख्यात: जानीयात् सर्वकामद: इस पंरपरा वाक्य पर कुंभ पर्व में मनुष्य की अललौकिक कामनाओं को पूर्ण करने वाला बताया गया है । यह भारतीय संस्कृति का धर्म के प्रति जागृति का प्रतीक है । कुंभ हर बारह वर्ष में और अर्ध्द कुंभ 6 वर्ष में लगते हैं । यह हमारे देश में धर्म के प्रति हिन्दुओं का सबसे बड़ा पर्व माना गया है । हरिद्वार में गंगा के बारे में पुराण में भी वर्णन है । बताया जाता है कि यहां साढ़े तीन करोड़ तीर्थ निवास करते हैं ।
जिससे हरिद्वार तीर्थ के गंगा स्नान को इन साढ़े तीन करोड़ तीर्थों के स्नान के बराबर पुण्य माना गया है । इस वर्ष होने वाला यह कुंभ हरिद्वार में तीन साही स्नान होने जा रहे हैं । प्रथम शिवरात्रि के दिन 12 फरवरी 2010, द्वितीय स्नान चैत्र की अमावश्या को 15 मार्च 2010, तथा तृतीय प्रमुख स्नान चैत्र के अंतिम दिन या बैशाख के प्रथम दिन 14 अप्रेल 2010 अर्थात जिस दिन बृहस्पति कुंभ राशि और सूर्य मेष राशि पर होगा उस दिन होने जा रहा है ।
इन शाही स्नानों में 13 अखाड़ों के साधु संत शामिल होते हैं । जिनमें जूना अखाड़ा, आव्हान अखाड़ा , पंच अखाड़ा , अग्नि अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अटल अखाड़ा प्रमुख है वैरागियों के तीन अखाड़ों में अनीय अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा अटल अखाड़ा हैं वहीं उदासीन सम्प्रदायों के अखाड़ों में पंचायती बाबा उदासीन, पंचायती नया उदासीन और निर्मल अखाड़ा प्रमुख रूप से स्नान करते हैं । इन अखाड़ों के साधु संत कुंभ और अर्द्द कुंभ में सर्वप्रथम स्नान करने के हकदार माने गये हैं । इनके शाही जुलूस और पेशवाई जुलूस देखते ही बनते हैं । read more »
केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय ने कला, संस्कृति और विरासत के लिए विजिटिंग फेलो योजना शुरू की ! इस योजना का उद्देश्य संस्कृति मंत्रालय के अधीन विभिन्न संस्थाओं को नये सिरे से ऊर्जावान बनाना है ।
संस्कृति मंत्रालय ने कला, संस्कृति और विरासत के लिए विजिटिंग फेलो नामक योजना की शुरूआत की है । मंत्रालय ने यह कदम संस्कृति मंत्री की हैसियत से प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद उठाया है ।
संस्कृति मंत्रालय के अधीन विभिन्न संस्थाओं के पास पांडुलिपियों, दस्तावेजों, कलाकृतियों, पुरातन सामग्रियों और चित्रों के रूप में विशाल खजाना मौजूद है । read more »
A classical music extravaganza was organized here at Raipur on Sunday night, enthralling the audience with remarkable performances at Rang Mandir auditorium, a well known cultural spot at Gandhi Chowk the heart of Raipur city.
Sur Samman a well-known institute for music, specially classical music in the Chhattisgarh State capital Raipur was the organizer of Tabla Girl Rimpa Shiva Solo Show.
Rimpa Shiva, world renowned Tabla player from kolkata and noted vocalist Keshav Talegaonkar were the centre of attraction.
They stole the show by mesmerizing the august gathering thought their enchanting performance in the accompaniment of Moradhwaj on Tabla. Bharat Rana, famous harmonium player, also accompanied them.
Large Number of audience turned up at the classical music extravaganza, enjoying ach and every bit of it. read more »
Raipur Tabla Vaadan Function on 11th October 2009 in Chhattisgarh
Classical Music and Award Ceremony organized at Rangmandir Raipur at 11 October 2009 by Sur Samman Music Organization.
Hemant Tiwari and Satya Ranjan Gangeley of Sur Samman Music Organization Raipur Chhattisgarh told that the World Famous (Vishwavikhyat) Tabla Girl Rimpa Shiva will perform Independent Solo Tabla Vadan. Look below Rimpa Shiva Tabla Video-:
Another Classical Singing performance will be by Keshav Talegaonkar. He will be accompanied by Moredhwaj Vaishnav on Tabla and Bharat Rana on Harmonium.
Culture Minister Chhattisgarh Shri Brijmohan Agrawal has a Chief Guest of the Raipur Tabla Vadan Function 2009.
After the performance Rimpa Shiva and Keshav Talegaonkar Sulekha Pendse and Mukund Bhale has felicitated by Sur Samman.
रामायण काल में राक्षस राज रावण की नगरी लंका को अतुल वैभव की महानगरी कहा गया है । जहां भगवान हनुमान भी पहुंचकर सुन्दर भवनों को देखकर विस्मय व विमुग्ध हो गये थे ।
वैदुर्य मणी व जड़ित सोने की खिड़की वाले अनेक भवन भव्य रूप में दृष्टिगत थे । यहां राक्षस राज में जो देवों के बीच विश्वकर्मा का है वह स्वरूप दिखाई देता है । काम तंत्र और काम वृत्त में राक्षसी संस्कृति और भी सबसे आगे थी । आर्थिक संपन्नता से विलासिता मंदिरा पान आदि अधिक मात्रा में बतायी गयी है । read more »
रामायण में अयोध्या के संबंध में यह ज्ञात होता है कि उसे मानवेन्द्र मनु ने बसाया था । यह नगरी 12 योजन लंबी और 3 योजन चौड़ी थी । यहां के राजमार्ग में आने जाने के लिए बीच में विभाजन था । जिसे प्रतिदिन जल से धोकर साफ किया जाता था ।
यहां उत्तम नगर निवेश के अनुसार मकान बने थे । सात महल के मकानों को विमान कहा जाता था । अयोध्या नगरी विमान गृहों से सुशोभित थी । यहां के निवासियों के पास पर्याप्त धन जिससे वे संतुष्ट थे और दूसरे के धन के प्रति लोभ का भाव नहीं रखते थे । वे सत्यवादी थे, सभी परिवार उत्कृष्ट वस्तुओं का संग्रह करते थे। यहां गुप्त ग्रहों की संख्या बहुत थी ।
अयोध्या इन्द्र की अमरावती की भांति थी । रामायण में ही सुग्रीव की राजधानी के वर्णन में किष्किंधा को एक सुरव्य गुहा होने के बावजूद धन धान्य से परिपूर्ण बताया गया है । नाना प्रकार के रत्न इस नगरी में श्री वृध्दि करते थे । संपूर्ण कामनाओं की पूर्ति करने वालों वृक्षों से यह नगरी को शोभा प्राप्त थी । read more »
किसी भी देष का निर्माण उसके नागरिकों के चरित्र से परिलक्षित होता है। भारत को महाराज मनु ने चरित्र निर्माण का षिक्षा केन्द्र के रूप में स्थापित किया था। आदिकाल से यहा स्थापित नालंदा विष्ववि्द्यालय एवं तक्षषिला जेसे संस्थान इस बात के प्रमाण है।
मनुष्य की वास्तिविक उन्नति सद्चरित्र निर्माण से ही संभव है। सद्चरित्र से ही भारत के महापुरूषों ने अपनी छाप विष्व के सामने रखी आज हमारे युवाओं के समक्ष पष्चिमी सभ्यता के अंधे अनुसरण एवं लार्ड़ मेंकाले की षिक्षा पध्दति से अनुषासनहीनता विभिन्न दुर्गुण फैषन असंयमित जीवन, नषा, अकर्मम्यणता जैसे व्यवहार चरित्र में बढ़ते जा रहें है जो कि हमारे देष में अब परिलक्षित होने लगी है। read more »
Dear friends.
When this time I planed to travel to Thailand, I chose Indian Air Lines. From Mumbai to Bangkok. Just an typical indian system I see at air port that all officials were age group over 30 years, also air hostages are same age group. With me my 9 students. They go for there hotel management course in Thailand, I tell to my students that they notice this ...
And on 07/08/09 when we reach Suvernbhumi international air port .. my students tell me . Sir this is very difference . in India over 30 years and here is 17 to 22 years? also given services to passengers is excellent, cleaning , behavior, and araa of port is very good. why this difference? read more »
Yuva Sandesh Comments
5 days 9 hours ago
5 days 9 hours ago
5 days 9 hours ago
5 days 9 hours ago
6 days 10 hours ago
1 week 13 hours ago
2 weeks 1 day ago
3 weeks 4 days ago
3 weeks 5 days ago
4 weeks 4 days ago