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"थाईलैंड --स्माइएलिग कंट्री"

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राजनीति नहीं देश भक्ति की सोचें .....

कहा भी जाता है न कि-"केवल राजनीति के प्रति जागरूकता किसी भी देश की प्रगति का आधार नहीं होती, आवश्यकता होती है देश भक्ति , धर्म के प्रति समर्पण की, राष्ट्र भाषा के प्रति पूर्ण कर्त्तव्य की भी , " यदि हम अपने देश के सन्दर्भ में देखतें हैं  read more »

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" रेडिओ जगत की पत्रिका : डी एक्स अंजलि "

दोस्तों,
संगीत की रचना में जो अपना समय और कला देतें हैं , यदि रेडिओ या टेलीविजन न हो तो संगीत एक सीमित दायरे में सिमट कर रह जाता है, पहले जब केवल रेडिओ होता था तो सभी रेडिओ सुनते थे .फिर जब टेलीविजन आया तो संगीत की धुनों को तस्वीर भी मिल गई , कुछ समय तो केवल टेलीविजन का ही एकाधिकार था , पर फिर ऍफ़ .एम् रेडिओ का चलन शुरू हुआ और फिर एक बार रेडिओ ने एक नए ढंग से अपना स्थान बनाया , साथ ही आकाशवाणी के प्रति लोगों में फिर झुकाव आया .

इन सबके बीच रेडिओ श्रोता संघ अपना काम करते रहे , इसी कड़ी में पहंदा (बलोदाबाजार) के झावेंद्र कुमार ध्रुव ने प्रयास किया , और कई महीनो के अथक प्रयासों , पुराने श्रोताओं से मिल कर , अनेक रेडियो स्टेशन की जानकारी एकत्र की और प्रकाशित की एक पत्रिका - " डी एक्स. अंजलि " .  read more »

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जीवन जीने की कला सिखातें हैं -- श्री श्री रविशंकर जी

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"नागरिकों में देश भक्ति की कमी के कारण आतंकवाद को मिलता है बढावा "

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व्यक्ति वादिता से बचें .......

प्रिये अजय जी,  read more »

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सभी को नव रात्रि की शुभकामनायें

सभी को नव रात्रि की शुभकामनायें
युवा सन्देश के सभी पाठकों एवं अजय त्रिपाठी जी को ----
"नव रात्रि " की हार्दिक शुभकामनायें -
मैया जी से हमारी प्रार्थना है कि आप सभी के जीवन में हर प्रकार की खुशियाँ , सफलताएँ सदा बनी रहें , आप सभी सदैव प्रसन्न रह कर स्वयं की और समाज की प्रगति में अपना सहयोग दें ...!
आप सभी का --
मोहन भया

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महा कुम्भ ... - एक अलोकिक अनुभव

महा कुम्भ ... - एक अलोकिक अनुभव
कुम्भ पर्व -हरिद्वार में गंगा तट पर , प्रयाग (इलाहबाद ) में गंगा ,यमुना और सरस्वती के संगम पर , नासिक में गोदावरी तथा उज्जैन में शिप्रा के किनारे लगने वाले कुम्भ में न केवल देश से अपितु विदेशों से भी अनगिनत संख्या में श्रद्धालु आतें हैं . यह पर्व चक्रीय क्रमानुसार प्रति तीसरे वर्ष संपन्न होता है . अर्थात इनमे से किसी एक स्थान पर कुम्भ की बारी बारह वर्षों बाद आती है. वैसे तो कुम्भ का मुख्य आधार समुन्द्र मथन की पौराणिक कथा है , जो संक्षेप में इस प्रकार है -- जब देव -दानवों के बीच समुन्द्र मंथन हो रहा था तो जब अमृत कलश मिला  read more »

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जागरूकता का आभाव नहीं - देश प्रेम का आभाव

प्रिय अजय जी ,

आपने एक वर्ग विशेष की तरफदारी करते हुए अपने जो विचार रखे उस से कम से कम मैं तो सहमत नहीं हूँ , एक उधाहरण बताना चाहूँगा - अमेरिका ने इस वर्ग विशेष के व्यक्ति को अपने देश में न केवल अच्छी शिक्षा दी अपितु उसे एक अच्छा सम्मान भी दिया , समय बीतने पर उसी ने अमेरिका में जो तांडव मचाया वो किसी से छुपा नहीं है ? अब भारत के विषय में देखें तो लगभग सभी राज्यों के अनेक नगर इनकी जनसंख्या से भरे पड़े हैं ? शायद इस ओर आपका धयान नहीं गया होगा ?

एक और उधाहरण देना चाहूँगा - आस्ट्रेलिया का , जिस समय आस्ट्रेलिया की जनसँख्या कम थी तो अमेरिका से लोग वहां रहने आये और अपने आप को अल्प संख्यक कह कर उन्होंने वहां अपनी संख्या बड़ाई और धीरे - धीरे उस पर अपना अधिकार कर लिया आज हालत यह है कि उस देश में मूल निवासी तो रहे नहीं केवल अमेरिकन रह गए हैं जो अपनी नस्ल भेदी नीतिओं के कारण बदनाम हैं .  read more »

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जागरूकता का आभाव

"यदि इन पक्न्तिओं से किसी को किसी प्रकार की ठेस पहुंचती है तो यह उसकी नादानी ही होगी क्योंकि पहले हम भारतीय हैं और हमारा भारत मूलतः हिन्दू राष्ट्र रहा है और रहेगा .'
पहले आते हैं - झंडे पर -  read more »

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