छत्तीसगढ़ में 57 साहित्यकारों का सम्मान
बिलासपुर छत्तीसगढ़ में राघवेन्द्रराव सभा भवन बिलासपुर में कल तीन दिवसीय साहित्यिक अनुष्ठान विकास संस्कृति महोत्सव के अंतर्गत आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी एवं समकालीन-विमर्श विषय पर आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के समापन के अवसर पर 57 साहित्यकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया।
राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी बिलासपुर छत्तीसगढ़ में सात राज्यों से साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता दर्ज करायी। प्रयास प्रकाशन द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर महोत्सव का शुभारंभ किया गया और साहित्यकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया ।
विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में उपस्थित साहित्यकारों का बिलासपुर में अभिनन्दन करते हुए कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य हमारे लिये अनमोल धरोहर है। हम चाहते हैं कि आप सभी उनके विचारधारा को जन-जन तक पहुंचायें, क्योंकि श्री द्विवेदी ने सनातन संस्कृति को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने जिन विधाओं पर लेखनी चलायी उन सभी में एक नया उन्मेष था। उनकी कृतियां लेखकों की भावी पीढ़ी के लिये नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करती है।
आचार्य हजारी प्रसाद का जीवन ज्ञान की अखण्ड साधना का प्रतीक है। संपूर्ण विश्व में उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक हैं।
साहित्य मानव समाज का दर्पण है। हम समाज में साहित्य के माध्यम से अच्छा वातावरण निर्मित कर सकते हैं तथा कुरीतियों को खत्म कर सकते हैं। हमारे साहित्यकार इस दिशा में प्रयासरत हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल ने कहा कि आप सभी साहित्यकार अपनी उत्कृष्ट लेखनी से प्रदेश के विकास में सहभागी बने तथा प्रदेश को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान करें।
कार्यक्रम को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के संयोजक डॉ. विनय पाठक, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनील वर्मा कुलपति सरगुजा विश्वविद्यालय तथा श्री अशोक सनोठिया श्रम न्यायाधीश सरगुजा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर विकास संस्कृति महोत्सव के संयोजक डॉ. बृजेश सिंह, साहित्यकार डॉ. पालेश्वर शर्मा, डॉ. विजय सिंह, श्री महेश शर्मा, डॉ. अजीत राय, डॉ. इन्दू टांक और पुष्पा सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आमंत्रित अतिथिगण, साहित्यकार और कवि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
Yuva Sandesh Comments
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