रामायण काल में राक्षस राज रावण की नगरी लंका को अतुल वैभव की महानगरी कहा गया है । जहां भगवान हनुमान भी पहुंचकर सुन्दर भवनों को देखकर विस्मय व विमुग्ध हो गये थे ।
वैदुर्य मणी व जड़ित सोने की खिड़की वाले अनेक भवन भव्य रूप में दृष्टिगत थे । यहां राक्षस राज में जो देवों के बीच विश्वकर्मा का है वह स्वरूप दिखाई देता है । काम तंत्र और काम वृत्त में राक्षसी संस्कृति और भी सबसे आगे थी । आर्थिक संपन्नता से विलासिता मंदिरा पान आदि अधिक मात्रा में बतायी गयी है ।
यहां धार्मिक अभ्युत्थान, धार्मिक उत्कर्ष , मणी कंचन संयोग हो तो कामवृत्त को प्रश्रय नहीं मिलेगा ऐसा माना जाता है लेकिन अयोध्या की संस्कृति इसी दृष्टि से किंष्किंधा और लंका से भिन्न और उत्कृष्ट थी ।
Yuva Sandesh Comments
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