प्रस्तावना - हमारा भारतीय समाज जो एकता व पारिवारिक संस्कृति में विश्वास करता है, सदा से बुजुर्गों को सम्मान व आदर देता आया है । हमारे बुजुर्ग जो दुनिया के अच्छे व बुरे अनुभवों के आधार पर समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं, वास्तव में इस आदर के हकदार होते हैं।
परिवार में बुजुर्गों की भूमिका - संयुक्त परिवार की कल्पना यदि एक वृक्ष के आधार पर की जाए तो हमारे बुजुर्गपन उस मजबूत साख की तरह होते हैं, जिस पर पूरा वृक्ष टिका हुआ होता है । परिवार में यदि दादा-दादी, नाना-नानी ना हो तो परिवार अधूरा सा लगता है । जीवन में कई बार हम उलझन व परेशानी में घिर जाते हैं तो हमारे परिवार के बुजुर्ग ही समस्याओं की धूप में अपने अनुभवी हाथों की छाया हमें देते हैं । वे हमें जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना करने की सीख व हौसला देते हैं ।
बुजुर्ग हमारे जीवन के पथ प्रदर्शक - हमारे बुजुर्गजन हमारे जीवन के पथ प्रदर्शक व आदर्श होते हैं । वे अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर हमें अच्छे व बूरे की पहचान कराते हैं । कभी वे किसी अबोध बालक की तरह मासूम प्रतीत होते हैं तो कभी किसी स्वावलम्बी मनुष्य के समान दृढ़। बुजुर्गजन हमेशा हमारा भला ही चाहते हैं। इसके लिए कभी वे हमें स्नेहपूर्वक समझाते हैं तो कभी कठोरतापूर्वक। वृध्दावस्था को दूसरी बाल्यावस्था कहा जाता है और यह सच भी क्योंकि वृध्दजन बिना किसी भेदभाव व छलकपट के हमारे जीवन को आलोकित करते है । आज का समय जहां एकल परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है, अपराध भी बढ़ते जा रहे है । इसके कई कारणों में एक कारण यह है कि हमारे परिवार में बुजुर्गों के महत्व व स्थान को कम किया जा रहा है ।
आज परिवार में अपनी गौरवशाली संस्कृति को समझाने व उसे आत्मसात करने का गुण सिखाने वाले बुजुर्ग कम होते जा रहे है। जिससे हम गलत व सही चीजों में फर्क करने की क्षमता खोते जा रहे हैं व केवल अंधानुकरण कर रहे है ।
वर्तमान समाज में बुजुर्गों की बढ़ती महत्ता - आज का वर्तमान युग जहां अच्छी चीजों सेज्यादा बुरी चीजें बढ़ती जा रही है। मानव अपने मूल्य खोता जा रहा है। हम इंसानियत भूल रहे है । ऐसे समय में हमें बुजुर्गों के साथ व उनके मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है ।
हम आज केवल पैसे व प्रतिष्ठा के पीछे भाग रहे है । हम भूल रहे है कि जब तक हम मजबूती से अपनी जड़ों को नहीं पकड़ेगें अपनी संस्कृति को आत्मसात नहीं करेंगे तब आधुनिक युग में अपनी दृढ़ व अमिट पहचान नहीं बना पायेंगे । इन सभी बातों का सार यही हैकि हम अपने गौरवशाली अतीत के अर्थात बुजुर्गों के आशीर्वाद व मार्गदर्शन को लेकर ही सुनहरे भविष्य की नींव डाल सकते हैं ।
उपसंहार - आज भारत जैसे देश में भी कई बुजुर्ग वृध्दाश्रम में अपने परिवार से दूर अपने जीवन के अंतिम समय को बीता रहे हैं । आज आवश्यकता है तो अपने देश में अपने बुजुर्गों को उनका उचित सम्मान व स्थान दिलाने की। उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की।
Yuva Sandesh Comments
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