प्यार का पर्व वेलेंतायन डे तो मनाये पर पेरेंट्स डे को याद रखे

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१४ फरबरी को एक बार प्यार के पर्व के रूप में मानाने प्यार के दीवाने तेयार है . ये पर्व हर साल की तरह फिर चर्चा में है 'राजधानी के तथाकतिथ हिंदूवादी परदे के पीछे प्यार करने वाले नेता आपने राजनेतिक लाभ के लिए इसका विरोध करते है प्यार कोई ईसी वेइसी चीज नहीं जो केवल दिखावा हो . ये तो दो दिलो का मिलन , दो दिलो की आत्मायो का मिलन ,दो दिलो के शारीर का मिलन , दो दिलो की भावनायो का मिलन और तो और दो लोगो का सम्पूर्ण मिलन होता है . जिसके एह्सास को केवल करने वाला और पाने वाला ही कर सकता है .हा लेकिन ये सार्वजानिक करने की चीज नहीं है .लेकिन किन्ही भी स्थानो पर आयोजित ऐसे कार्यक्रमों का विरोध भी जायज नहीं कहा जा सकता है मैंने पिचले वर्ष यह महशुश किया था की हम विदेशी संस्कृती के वेलेंतायन डे को तो बड़े जोर शोर से मानते है लेकिन उनके ही द्वारा मनाये जाने वाले पेरेंट्स डे को याद भी नहीं करते है , जबकि भारतीय संस्कृती में माता पिता पालक का सर्वोच्च स्थान है