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लोके कुंभइति ख्यात: जानीयात् सर्वकामद: इस पंरपरा वाक्य पर कुंभ पर्व में मनुष्य की अललौकिक कामनाओं को पूर्ण करने वाला बताया गया है । यह भारतीय संस्कृति का धर्म के प्रति जागृति का प्रतीक है । कुंभ हर बारह वर्ष में और अर्ध्द कुंभ 6 वर्ष में लगते हैं । यह हमारे देश में धर्म के प्रति हिन्दुओं का सबसे बड़ा पर्व माना गया है । हरिद्वार में गंगा के बारे में पुराण में भी वर्णन है । बताया जाता है कि यहां साढ़े तीन करोड़ तीर्थ निवास करते हैं ।
जिससे हरिद्वार तीर्थ के गंगा स्नान को इन साढ़े तीन करोड़ तीर्थों के स्नान के बराबर पुण्य माना गया है । इस वर्ष होने वाला यह कुंभ हरिद्वार में तीन साही स्नान होने जा रहे हैं । प्रथम शिवरात्रि के दिन 12 फरवरी 2010, द्वितीय स्नान चैत्र की अमावश्या को 15 मार्च 2010, तथा तृतीय प्रमुख स्नान चैत्र के अंतिम दिन या बैशाख के प्रथम दिन 14 अप्रेल 2010 अर्थात जिस दिन बृहस्पति कुंभ राशि और सूर्य मेष राशि पर होगा उस दिन होने जा रहा है ।
इन शाही स्नानों में 13 अखाड़ों के साधु संत शामिल होते हैं । जिनमें जूना अखाड़ा, आव्हान अखाड़ा , पंच अखाड़ा , अग्नि अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अटल अखाड़ा प्रमुख है वैरागियों के तीन अखाड़ों में अनीय अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा अटल अखाड़ा हैं वहीं उदासीन सम्प्रदायों के अखाड़ों में पंचायती बाबा उदासीन, पंचायती नया उदासीन और निर्मल अखाड़ा प्रमुख रूप से स्नान करते हैं । इन अखाड़ों के साधु संत कुंभ और अर्द्द कुंभ में सर्वप्रथम स्नान करने के हकदार माने गये हैं । इनके शाही जुलूस और पेशवाई जुलूस देखते ही बनते हैं ।
वैरागी अखाड़ों में तीन अड़ियों के 18 अखाड़े कुंभ के लिए हरिद्वार में स्नान करेंगे । शाही स्नान के दौरान वैष्णवों के 18 अखाड़ों से 700 खाल्से स्नान करेंगे । एक एक खाल्सों में हजारों नागा साधु संत शामिल होते हैं ।
हरिद्वार को स्वर्ग के द्वार के समान मान्यता प्रदान की गयी है । यहां जो कोटि तीर्थ में स्नान करते हैं उसे पुण्डरीक यज्ञ का फल प्राप्त होना माना गया है इससे वह स्नानकर्ता अपने परिवार का उध्दार कर देता है। यहां एक रात्रि विश्राम करने पर सहस्त्र गोदान का फल मिलता है । सप्त गंगा, त्रि गंगा और सकरावत में विधिपूर्वक पृत तर्पण करने से पृतों का पुण्य लोक में प्रतिष्ठापन होता है ।
गंगा के तीर्थों में प्रमुख रूप से तीन तीर्थों की गणना की गयी है । हरिद्वार, प्रयाग और गंगा सागर जी प्रमुख रूप से बताये गये हैं । यहां क्रमश: स्नान करने से ब्रह्म लोक, विष्णु लोक तथा शिव लोक की प्राप्ति होती है । गंगा को शैव समुदाय जहां अपनी ईष्ट देवी मानते हैं वहीं वैष्णवों के लिए विष्णु पदी के रूप में पूज्यनीय है । एवं साग सप्रदाय तो गंगा को अनादि शक्ति के रूप में पूजते हैं । मां गंगा के दर्शन मात्र से विष्णु लोक की प्राप्ति होती है । जल पीने से सारूप्य प्रदान होता है । और इसमें स्नान करने पर भगवान विष्णु के उत्तम धाम को जाने का तथा मनोवांछित फल प्राप्त होने का वर्णन किया गया है।
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