एकीकृत सफाई योजना आई. एल. सी. एस.

कम लागत वाली एकीकृत सफाई (आईएलसीएस) योजना

एकीकृत कम लागत वाली सफाई योजना का उद्देश्य प्राचीन समय से सफाईकर्मियों द्वारा मैला ढोने के घिनौने कार्य से मुक्ति दिलाते हुए व्यक्तिगत सूखे शौचालय को पानी डालने के शौचालय में बदलना है ।

आईएलसीएस योजना का प्रारम्भ 1980-81 में गृह मंत्रालय के जरिये और बाद में सामाजिक न्याय और सहकारिता मंत्रालय के जरिये किया गया था । 1989-90 में यह योजना शहरी विकास और गरीबी उपशमन मंत्रालय तथा 2003-04 से यूईपीएएचयूपीए मंत्रालय को हस्तांतिरत कर दी गयी थी । योजना ने अब तक 60,000 सफाईकर्मियों से अधिक को मुक्ति दिलाने के लिए 28 लाख शौचालयों से अधिक का निर्माण करनेबदलने में मदद की है ।

आईएलसीएस योजना के कार्यान्वयन के दौरान यह देखा गया कि अनेक कारणों से यह योजना अच्छी तरह कार्य नहीं कर रही है । योजना को अधिक आकर्षक और कार्यान्वयन योग्य बनाने के लिए 17 जनवरी, 2008 से दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया है ।

योजना के तहत केन्द्रीय राजसहायता 75 प्रतिशत, राज्य की राजसहायता 15 प्रतिशत तथा 10 प्रतिशत हिस्सा लाभार्थी का है । पूर्ण इकाई के लिए लागत की ऊपरी सीमा 10,000 रुपये हैं । कठिन और पहाड़ी क्षेत्रों की श्रेणी वाले राज्यों के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त लागत उपलब्ध करायी गयी है । 2009-10 को योजना का अंतिम वर्ष होने का उद्देश्य रखा गया है ।

आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्री कुमारी सैलजा के अनुसार पिछले एक वर्ष के भीतर आन्ध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नगालैंड और असम राज्यों ने कहा है कि अब उनके यहां सूखे शौचालय नहीं हैं । वर्तमान में देश में केवल चार राज्य नामत: बिहार, उत्तराखण्ड, जम्मू- कश्मीर और उत्तर प्रदेश शेष हैं जिन्हें इस आवश्यकता को पूरा करना है । आईएलसीएस के संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत 2008-09 और 2009-10 (31.08.2009 तक) के दौरान संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत परिवर्तन के लिए 2,41,931 इकाइयों और निर्माण के लिए 32,305 इकाइयों को मंजूरी दी गयी है ।